🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 10

The Book of the Aftermath · Entry 10 of 270 · type: चौपाई

इहाँ भानुकुल कमल दिवाकर। कपिन्ह देखावत नगर मनोहर।। सुनु कपीस अंगद लंकेसा। पावन पुरी रुचिर यह देसा।। जद्यपि सब बैकुंठ बखाना। बेद पुरान बिदित जगु जाना।। अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ। यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ।। जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि। उत्तर दिसि बह सरजू पावनि।। जा मज्जन ते बिनहिं प्रयासा। मम समीप नर पावहिं बासा।। अति प्रिय मोहि इहाँ के बासी। मम धामदा पुरी सुख रासी।। हरषे सब कपि सुनि प्रभु बानी। धन्य अवध जो राम बखानी।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 10 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷