🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 96

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 96 of 273 · type: चौपाई

सकल मरमु रघुनायक जाना। लिए बोलि अंगद हनुमाना।। समाचार सब कहि समुझाए। सुनत कोपि कपिकुंजर धाए।। पुनि कृपाल हँसि चाप चढ़ावा। पावक सायक सपदि चलावा।। भयउ प्रकास कतहुँ तम नाहीं। ग्यान उदयँ जिमि संसय जाहीं।। भालु बलीमुख पाइ प्रकासा। धाए हरष बिगत श्रम त्रासा।। हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।। भागत पट पटकहिं धरि धरनी। करहिं भालु कपि अद्भुत करनी।। गहि पद डारहिं सागर माहीं। मकर उरग झष धरि धरि खाहीं।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 96 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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