🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 92

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 92 of 273 · type: चौपाई

महा महा मुखिआ जे पावहिं। ते पद गहि प्रभु पास चलावहिं।। कहइ बिभीषनु तिन्ह के नामा। देहिं राम तिन्हहू निज धामा।। खल मनुजाद द्विजामिष भोगी। पावहिं गति जो जाचत जोगी।। उमा राम मृदुचित करुनाकर। बयर भाव सुमिरत मोहि निसिचर।। देहिं परम गति सो जियँ जानी। अस कृपाल को कहहु भवानी।। अस प्रभु सुनि न भजहिं भ्रम त्यागी। नर मतिमंद ते परम अभागी।। अंगद अरु हनुमंत प्रबेसा। कीन्ह दुर्ग अस कह अवधेसा।। लंकाँ द्वौ कपि सोहहिं कैसें। मथहि सिंधु दुइ मंदर जैसें।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 92 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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