🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 88

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 88 of 273 · type: चौपाई

भय आतुर कपि भागन लागे। जद्यपि उमा जीतिहहिं आगे।। कोउ कह कहँ अंगद हनुमंता। कहँ नल नील दुबिद बलवंता।। निज दल बिकल सुना हनुमाना। पच्छिम द्वार रहा बलवाना।। मेघनाद तहँ करइ लराई। टूट न द्वार परम कठिनाई।। पवनतनय मन भा अति क्रोधा। गर्जेउ प्रबल काल सम जोधा।। कूदि लंक गढ़ ऊपर आवा। गहि गिरि मेघनाद कहुँ धावा।। भंजेउ रथ सारथी निपाता। ताहि हृदय महुँ मारेसि लाता।। दुसरें सूत बिकल तेहि जाना। स्यंदन घालि तुरत गृह आना।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 88 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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