🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 7

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 7 of 273 · type: चौपाई

जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं।। जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि।। होइ अकाम जो छल तजि सेइहि। भगति मोरि तेहि संकर देइहि।। मम कृत सेतु जो दरसनु करिही। सो बिनु श्रम भवसागर तरिही।। राम बचन सब के जिय भाए। मुनिबर निज निज आश्रम आए।। गिरिजा रघुपति कै यह रीती। संतत करहिं प्रनत पर प्रीती।। बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृपाँ जसु भयउ उजागर।। बूड़हिं आनहि बोरहिं जेई। भए उपल बोहित सम तेई।। महिमा यह न जलधि कइ बरनी। पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 7 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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