🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 69
The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 69 of 273 · type: चौपाई
मै तव दसन तोरिबे लायक। आयसु मोहि न दीन्ह रघुनायक।।
असि रिस होति दसउ मुख तोरौं। लंका गहि समुद्र महँ बोरौं।।
गूलरि फल समान तव लंका। बसहु मध्य तुम्ह जंतु असंका।।
मैं बानर फल खात न बारा। आयसु दीन्ह न राम उदारा।।
जुगति सुनत रावन मुसुकाई। मूढ़ सिखिहि कहँ बहुत झुठाई।।
बालि न कबहुँ गाल अस मारा। मिलि तपसिन्ह तैं भएसि लबारा।।
साँचेहुँ मैं लबार भुज बीहा। जौं न उपारिउँ तव दस जीहा।।
समुझि राम प्रताप कपि कोपा। सभा माझ पन करि पद रोपा।।
जौं मम चरन सकसि सठ टारी। फिरहिं रामु सीता मैं हारी।।
सुनहु सुभट सब कह दससीसा। पद गहि धरनि पछारहु कीसा।।
इंद्रजीत आदिक बलवाना। हरषि उठे जहँ तहँ भट नाना।।
झपटहिं करि बल बिपुल उपाई। पद न टरइ बैठहिं सिरु नाई।।
पुनि उठि झपटहीं सुर आराती। टरइ न कीस चरन एहि भाँती।।
पुरुष कुजोगी जिमि उरगारी। मोह बिटप नहिं सकहिं उपारी।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 69 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī
Place in the Mānas
- Entry 69 of 273 in Laṅkā-Kāṇḍa (Kāṇḍa 6 of 7)
- Verse type: चौपाई
- Kāṇḍa theme: Setu-bandha to Laṅkā · the great war · Kumbhakarṇa-Indrajit-Rāvaṇa fall sequentially · Vibhīṣaṇa coronated · the puṣpaka return · Rāma's coronation at Ayodhyā · Rāmarājya begins
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