🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 5

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 5 of 273 · type: चौपाई

सैल बिसाल आनि कपि देहीं। कंदुक इव नल नील ते लेहीं।। देखि सेतु अति सुंदर रचना। बिहसि कृपानिधि बोले बचना।। परम रम्य उत्तम यह धरनी। महिमा अमित जाइ नहिं बरनी।। करिहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे हृदयँ परम कलपना।। सुनि कपीस बहु दूत पठाए। मुनिबर सकल बोलि लै आए।। लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा।। सिव द्रोही मम भगत कहावा। सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा।। संकर बिमुख भगति चह मोरी। सो नारकी मूढ़ मति थोरी।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 5 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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