🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 3

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 3 of 273 · type: चौपाई

यह लघु जलधि तरत कति बारा। अस सुनि पुनि कह पवनकुमारा।। प्रभु प्रताप बड़वानल भारी। सोषेउ प्रथम पयोनिधि बारी।। तब रिपु नारी रुदन जल धारा। भरेउ बहोरि भयउ तेहिं खारा।। सुनि अति उकुति पवनसुत केरी। हरषे कपि रघुपति तन हेरी।। जामवंत बोले दोउ भाई। नल नीलहि सब कथा सुनाई।। राम प्रताप सुमिरि मन माहीं। करहु सेतु प्रयास कछु नाहीं।। बोलि लिए कपि निकर बहोरी। सकल सुनहु बिनती कछु मोरी।। राम चरन पंकज उर धरहू। कौतुक एक भालु कपि करहू।। धावहु मर्कट बिकट बरूथा। आनहु बिटप गिरिन्ह के जूथा।। सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 3 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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