🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 27

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 27 of 273 · type: चौपाई

देखु बिभीषन दच्छिन आसा। घन घंमड दामिनि बिलासा।। मधुर मधुर गरजइ घन घोरा। होइ बृष्टि जनि उपल कठोरा।। कहत बिभीषन सुनहु कृपाला। होइ न तड़ित न बारिद माला।। लंका सिखर उपर आगारा। तहँ दसकंघर देख अखारा।। छत्र मेघडंबर सिर धारी। सोइ जनु जलद घटा अति कारी।। मंदोदरी श्रवन ताटंका। सोइ प्रभु जनु दामिनी दमंका।। बाजहिं ताल मृदंग अनूपा। सोइ रव मधुर सुनहु सुरभूपा।। प्रभु मुसुकान समुझि अभिमाना। चाप चढ़ाइ बान संधाना।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 27 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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