🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 19

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 19 of 273 · type: चौपाई

कहहिं सचिव सठ ठकुरसोहाती। नाथ न पूर आव एहि भाँती।। बारिधि नाघि एक कपि आवा। तासु चरित मन महुँ सबु गावा।। छुधा न रही तुम्हहि तब काहू। जारत नगरु कस न धरि खाहू।। सुनत नीक आगें दुख पावा। सचिवन अस मत प्रभुहि सुनावा।। जेहिं बारीस बँधायउ हेला। उतरेउ सेन समेत सुबेला।। सो भनु मनुज खाब हम भाई। बचन कहहिं सब गाल फुलाई।। तात बचन मम सुनु अति आदर। जनि मन गुनहु मोहि करि कादर।। प्रिय बानी जे सुनहिं जे कहहीं। ऐसे नर निकाय जग अहहीं।। बचन परम हित सुनत कठोरे। सुनहिं जे कहहिं ते नर प्रभु थोरे।। प्रथम बसीठ पठउ सुनु नीती। सीता देइ करहु पुनि प्रीती।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 19 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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