🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 13

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 13 of 273 · type: चौपाई

निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।। मंदोदरीं सुन्यो प्रभु आयो। कौतुकहीं पाथोधि बँधायो।। कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।। चरन नाइ सिरु अंचलु रोपा। सुनहु बचन पिय परिहरि कोपा।। नाथ बयरु कीजे ताही सों। बुधि बल सकिअ जीति जाही सों।। तुम्हहि रघुपतिहि अंतर कैसा। खलु खद्योत दिनकरहि जैसा।। अतिबल मधु कैटभ जेहिं मारे। महाबीर दितिसुत संघारे।। जेहिं बलि बाँधि सहजभुज मारा। सोइ अवतरेउ हरन महि भारा।। तासु बिरोध न कीजिअ नाथा। काल करम जिव जाकें हाथा।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 13 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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