🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 119

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 119 of 273 · type: चौपाई

कपि तव दरस भइउँ निष्पापा। मिटा तात मुनिबर कर सापा।। मुनि न होइ यह निसिचर घोरा। मानहु सत्य बचन कपि मोरा।। अस कहि गई अपछरा जबहीं। निसिचर निकट गयउ कपि तबहीं।। कह कपि मुनि गुरदछिना लेहू। पाछें हमहि मंत्र तुम्ह देहू।। सिर लंगूर लपेटि पछारा। निज तनु प्रगटेसि मरती बारा।। राम राम कहि छाड़ेसि प्राना। सुनि मन हरषि चलेउ हनुमाना।। देखा सैल न औषध चीन्हा। सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा।। गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ। अवधपुरी उपर कपि गयऊ।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 119 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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