🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 113

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 113 of 273 · type: चौपाई

सुनु गिरिजा क्रोधानल जासू। जारइ भुवन चारिदस आसू।। सक संग्राम जीति को ताही। सेवहिं सुर नर अग जग जाही।। यह कौतूहल जानइ सोई। जा पर कृपा राम कै होई।। संध्या भइ फिरि द्वौ बाहनी। लगे सँभारन निज निज अनी।। ब्यापक ब्रह्म अजित भुवनेस्वर। लछिमन कहाँ बूझ करुनाकर।। तब लगि लै आयउ हनुमाना। अनुज देखि प्रभु अति दुख माना।। जामवंत कह बैद सुषेना। लंकाँ रहइ को पठई लेना।। धरि लघु रूप गयउ हनुमंता। आनेउ भवन समेत तुरंता।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 113 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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