🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 103

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 103 of 273 · type: चौपाई

कहँ कोसलाधीस द्वौ भ्राता। धन्वी सकल लोक बिख्याता।। कहँ नल नील दुबिद सुग्रीवा। अंगद हनूमंत बल सींवा।। कहाँ बिभीषनु भ्राताद्रोही। आजु सबहि हठि मारउँ ओही।। अस कहि कठिन बान संधाने। अतिसय क्रोध श्रवन लगि ताने।। सर समुह सो छाड़ै लागा। जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा।। जहँ तहँ परत देखिअहिं बानर। सन्मुख होइ न सके तेहि अवसर।। जहँ तहँ भागि चले कपि रीछा। बिसरी सबहि जुद्ध कै ईछा।। सो कपि भालु न रन महँ देखा। कीन्हेसि जेहि न प्रान अवसेषा।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 103 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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