🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 96

The Book of Childhood · Entry 96 of 760 · type: चौपाई

जैसे मिटै मोर भ्रम भारी। कहहु सो कथा नाथ बिस्तारी।। जागबलिक बोले मुसुकाई। तुम्हहि बिदित रघुपति प्रभुताई।। राममगत तुम्ह मन क्रम बानी। चतुराई तुम्हारी मैं जानी।। चाहहु सुनै राम गुन गूढ़ा। कीन्हिहु प्रस्न मनहुँ अति मूढ़ा।। तात सुनहु सादर मनु लाई। कहउँ राम कै कथा सुहाई।। महामोहु महिषेसु बिसाला। रामकथा कालिका कराला।। रामकथा ससि किरन समाना। संत चकोर करहिं जेहि पाना।। ऐसेइ संसय कीन्ह भवानी। महादेव तब कहा बखानी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 96 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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