🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 92

The Book of Childhood · Entry 92 of 760 · type: चौपाई

एहि प्रकार भरि माघ नहाहीं। पुनि सब निज निज आश्रम जाहीं।। प्रति संबत अति होइ अनंदा। मकर मज्जि गवनहिं मुनिबृंदा।। एक बार भरि मकर नहाए। सब मुनीस आश्रमन्ह सिधाए।। जगबालिक मुनि परम बिबेकी। भरव्दाज राखे पद टेकी।। सादर चरन सरोज पखारे। अति पुनीत आसन बैठारे।। करि पूजा मुनि सुजस बखानी। बोले अति पुनीत मृदु बानी।। नाथ एक संसउ बड़ मोरें। करगत बेदतत्व सबु तोरें।। कहत सो मोहि लागत भय लाजा। जौ न कहउँ बड़ होइ अकाजा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 92 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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