🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 9

The Book of Childhood · Entry 9 of 760 · type: चौपाई

बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ।। पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें।। हरि हर जस राकेस राहु से। पर अकाज भट सहसबाहु से।। जे पर दोष लखहिं सहसाखी। पर हित घृत जिन्ह के मन माखी।। तेज कृसानु रोष महिषेसा। अघ अवगुन धन धनी धनेसा।। उदय केत सम हित सबही के। कुंभकरन सम सोवत नीके।। पर अकाजु लगि तनु परिहरहीं। जिमि हिम उपल कृषी दलि गरहीं।। बंदउँ खल जस सेष सरोषा। सहस बदन बरनइ पर दोषा।। पुनि प्रनवउँ पृथुराज समाना। पर अघ सुनइ सहस दस काना।। बहुरि सक्र सम बिनवउँ तेही। संतत सुरानीक हित जेही।। बचन बज्र जेहि सदा पिआरा। सहस नयन पर दोष निहारा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 9 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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