🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 84

The Book of Childhood · Entry 84 of 760 · type: चौपाई

सीय स्वयंबर कथा सुहाई। सरित सुहावनि सो छबि छाई।। नदी नाव पटु प्रस्न अनेका। केवट कुसल उतर सबिबेका।। सुनि अनुकथन परस्पर होई। पथिक समाज सोह सरि सोई।। घोर धार भृगुनाथ रिसानी। घाट सुबद्ध राम बर बानी।। सानुज राम बिबाह उछाहू। सो सुभ उमग सुखद सब काहू।। कहत सुनत हरषहिं पुलकाहीं। ते सुकृती मन मुदित नहाहीं।। राम तिलक हित मंगल साजा। परब जोग जनु जुरे समाजा।। काई कुमति केकई केरी। परी जासु फल बिपति घनेरी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 84 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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