🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 82

The Book of Childhood · Entry 82 of 760 · type: चौपाई

रामभगति सुरसरितहि जाई। मिली सुकीरति सरजु सुहाई।। सानुज राम समर जसु पावन। मिलेउ महानदु सोन सुहावन।। जुग बिच भगति देवधुनि धारा। सोहति सहित सुबिरति बिचारा।। त्रिबिध ताप त्रासक तिमुहानी। राम सरुप सिंधु समुहानी।। मानस मूल मिली सुरसरिही। सुनत सुजन मन पावन करिही।। बिच बिच कथा बिचित्र बिभागा। जनु सरि तीर तीर बन बागा।। उमा महेस बिबाह बराती। ते जलचर अगनित बहुभाँती।। रघुबर जनम अनंद बधाई। भवँर तरंग मनोहरताई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 82 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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