🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 80

The Book of Childhood · Entry 80 of 760 · type: चौपाई

जौं करि कष्ट जाइ पुनि कोई। जातहिं नींद जुड़ाई होई।। जड़ता जाड़ बिषम उर लागा। गएहुँ न मज्जन पाव अभागा।। करि न जाइ सर मज्जन पाना। फिरि आवइ समेत अभिमाना।। जौं बहोरि कोउ पूछन आवा। सर निंदा करि ताहि बुझावा।। सकल बिघ्न ब्यापहि नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही।। सोइ सादर सर मज्जनु करई। महा घोर त्रयताप न जरई।। ते नर यह सर तजहिं न काऊ। जिन्ह के राम चरन भल भाऊ।। जो नहाइ चह एहिं सर भाई। सो सतसंग करउ मन लाई।। अस मानस मानस चख चाही। भइ कबि बुद्धि बिमल अवगाही।। भयउ हृदयँ आनंद उछाहू। उमगेउ प्रेम प्रमोद प्रबाहू।। चली सुभग कबिता सरिता सो। राम बिमल जस जल भरिता सो।। सरजू नाम सुमंगल मूला। लोक बेद मत मंजुल कूला।। नदी पुनीत सुमानस नंदिनि। कलिमल तृन तरु मूल निकंदिनि।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 80 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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