🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 7

The Book of Childhood · Entry 7 of 760 · type: चौपाई

मज्जन फल पेखिअ ततकाला। काक होहिं पिक बकउ मराला।। सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई।। बालमीक नारद घटजोनी। निज निज मुखनि कही निज होनी।। जलचर थलचर नभचर नाना। जे जड़ चेतन जीव जहाना।। मति कीरति गति भूति भलाई। जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई।। सो जानब सतसंग प्रभाऊ। लोकहुँ बेद न आन उपाऊ।। बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।। सतसंगत मुद मंगल मूला। सोइ फल सिधि सब साधन फूला।। सठ सुधरहिं सतसंगति पाई। पारस परस कुधात सुहाई।। बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं। फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं।। बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी। कहत साधु महिमा सकुचानी।। सो मो सन कहि जात न कैसें। साक बनिक मनि गुन गन जैसें।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 7 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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