🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 66
The Book of Childhood · Entry 66 of 760 · type: चौपाई
राम चरित चिंतामनि चारू। संत सुमति तिय सुभग सिंगारू।।
जग मंगल गुन ग्राम राम के। दानि मुकुति धन धरम धाम के।।
सदगुर ग्यान बिराग जोग के। बिबुध बैद भव भीम रोग के।।
जननि जनक सिय राम प्रेम के। बीज सकल ब्रत धरम नेम के।।
समन पाप संताप सोक के। प्रिय पालक परलोक लोक के।।
सचिव सुभट भूपति बिचार के। कुंभज लोभ उदधि अपार के।।
काम कोह कलिमल करिगन के। केहरि सावक जन मन बन के।।
अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद घन दारिद दवारि के।।
मंत्र महामनि बिषय ब्याल के। मेटत कठिन कुअंक भाल के।।
हरन मोह तम दिनकर कर से। सेवक सालि पाल जलधर से।।
अभिमत दानि देवतरु बर से। सेवत सुलभ सुखद हरि हर से।।
सुकबि सरद नभ मन उडगन से। रामभगत जन जीवन धन से।।
सकल सुकृत फल भूरि भोग से। जग हित निरुपधि साधु लोग से।।
सेवक मन मानस मराल से। पावक गंग तंरग माल से।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 66 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī
Place in the Mānas
- Entry 66 of 760 in Bāla-Kāṇḍa (Kāṇḍa 1 of 7)
- Verse type: चौपाई
- Kāṇḍa theme: Maṅgalācaraṇa (the auspicious opening · Gaṇeśa-Sarasvatī-Śiva-Pārvatī-Hari-Hara invocations) · Rāma's līlā in childhood · Viśvāmitra-yajña-protection · Sītā-svayaṁvara at Mithilā · the four brothers' weddings
Navigation
🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷