🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 546

The Book of Childhood · Entry 546 of 760 · type: चौपाई

प्रभु दोउ चापखंड महि डारे। देखि लोग सब भए सुखारे।। कोसिकरुप पयोनिधि पावन। प्रेम बारि अवगाहु सुहावन।। रामरूप राकेसु निहारी। बढ़त बीचि पुलकावलि भारी।। बाजे नभ गहगहे निसाना। देवबधू नाचहिं करि गाना।। ब्रह्मादिक सुर सिद्ध मुनीसा। प्रभुहि प्रसंसहि देहिं असीसा।। बरिसहिं सुमन रंग बहु माला। गावहिं किंनर गीत रसाला।। रही भुवन भरि जय जय बानी। धनुषभंग धुनि जात न जानी।। मुदित कहहिं जहँ तहँ नर नारी। भंजेउ राम संभुधनु भारी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 546 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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