🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 521

The Book of Childhood · Entry 521 of 760 · type: चौपाई

नृप भुजबल बिधु सिवधनु राहू। गरुअ कठोर बिदित सब काहू।। रावनु बानु महाभट भारे। देखि सरासन गवँहिं सिधारे।। सोइ पुरारि कोदंडु कठोरा। राज समाज आजु जोइ तोरा।। त्रिभुवन जय समेत बैदेही।।बिनहिं बिचार बरइ हठि तेही।। सुनि पन सकल भूप अभिलाषे। भटमानी अतिसय मन माखे।। परिकर बाँधि उठे अकुलाई। चले इष्टदेवन्ह सिर नाई।। तमकि ताकि तकि सिवधनु धरहीं। उठइ न कोटि भाँति बलु करहीं।। जिन्ह के कछु बिचारु मन माहीं। चाप समीप महीप न जाहीं।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 521 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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