🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 5

The Book of Childhood · Entry 5 of 760 · type: चौपाई

गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन अमिअ दृग दोष बिभंजन।। तेहिं करि बिमल बिबेक बिलोचन। बरनउँ राम चरित भव मोचन।। बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।। सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी।। साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू।। जो सहि दुख परछिद्र दुरावा। बंदनीय जेहिं जग जस पावा।। मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू।। राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा।। बिधि निषेधमय कलि मल हरनी। करम कथा रबिनंदनि बरनी।। हरि हर कथा बिराजति बेनी। सुनत सकल मुद मंगल देनी।। बटु बिस्वास अचल निज धरमा। तीरथराज समाज सुकरमा।। सबहिं सुलभ सब दिन सब देसा। सेवत सादर समन कलेसा।। अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देइ सद्य फल प्रगट प्रभाऊ।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 5 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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