🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 46

The Book of Childhood · Entry 46 of 760 · type: चौपाई

नाम जीहँ जपि जागहिं जोगी। बिरति बिरंचि प्रपंच बियोगी।। ब्रह्मसुखहि अनुभवहिं अनूपा। अकथ अनामय नाम न रूपा।। जाना चहहिं गूढ़ गति जेऊ। नाम जीहँ जपि जानहिं तेऊ।। साधक नाम जपहिं लय लाएँ। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएँ।। जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।। राम भगत जग चारि प्रकारा। सुकृती चारिउ अनघ उदारा।। चहू चतुर कहुँ नाम अधारा। ग्यानी प्रभुहि बिसेषि पिआरा।। चहुँ जुग चहुँ श्रुति ना प्रभाऊ। कलि बिसेषि नहिं आन उपाऊ।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 46 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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