🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 380

The Book of Childhood · Entry 380 of 760 · type: चौपाई

कामरूप जानहिं सब माया। सपनेहुँ जिन्ह कें धरम न दाया।। दसमुख बैठ सभाँ एक बारा। देखि अमित आपन परिवारा।। सुत समूह जन परिजन नाती। गे को पार निसाचर जाती।। सेन बिलोकि सहज अभिमानी। बोला बचन क्रोध मद सानी।। सुनहु सकल रजनीचर जूथा। हमरे बैरी बिबुध बरूथा।। ते सनमुख नहिं करही लराई। देखि सबल रिपु जाहिं पराई।। तेन्ह कर मरन एक बिधि होई। कहउँ बुझाइ सुनहु अब सोई।। द्विजभोजन मख होम सराधा।।सब कै जाइ करहु तुम्ह बाधा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 380 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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