🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 360

The Book of Childhood · Entry 360 of 760 · type: चौपाई

तापस नृप निज सखहि निहारी। हरषि मिलेउ उठि भयउ सुखारी।। मित्रहि कहि सब कथा सुनाई। जातुधान बोला सुख पाई।। अब साधेउँ रिपु सुनहु नरेसा। जौं तुम्ह कीन्ह मोर उपदेसा।। परिहरि सोच रहहु तुम्ह सोई। बिनु औषध बिआधि बिधि खोई।। कुल समेत रिपु मूल बहाई। चौथे दिवस मिलब मैं आई।। तापस नृपहि बहुत परितोषी। चला महाकपटी अतिरोषी।। भानुप्रतापहि बाजि समेता। पहुँचाएसि छन माझ निकेता।। नृपहि नारि पहिं सयन कराई। हयगृहँ बाँधेसि बाजि बनाई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 360 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷