🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 358

The Book of Childhood · Entry 358 of 760 · type: चौपाई

सयन कीन्ह नृप आयसु मानी। आसन जाइ बैठ छलग्यानी।। श्रमित भूप निद्रा अति आई। सो किमि सोव सोच अधिकाई।। कालकेतु निसिचर तहँ आवा। जेहिं सूकर होइ नृपहि भुलावा।। परम मित्र तापस नृप केरा। जानइ सो अति कपट घनेरा।। तेहि के सत सुत अरु दस भाई। खल अति अजय देव दुखदाई।। प्रथमहि भूप समर सब मारे। बिप्र संत सुर देखि दुखारे।। तेहिं खल पाछिल बयरु सँभरा। तापस नृप मिलि मंत्र बिचारा।। जेहि रिपु छय सोइ रचेन्हि उपाऊ। भावी बस न जान कछु राऊ।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 358 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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