🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 352

The Book of Childhood · Entry 352 of 760 · type: चौपाई

सुनु नृप बिबिध जतन जग माहीं। कष्टसाध्य पुनि होहिं कि नाहीं।। अहइ एक अति सुगम उपाई। तहाँ परंतु एक कठिनाई।। मम आधीन जुगुति नृप सोई। मोर जाब तव नगर न होई।। आजु लगें अरु जब तें भयऊँ। काहू के गृह ग्राम न गयऊँ।। जौं न जाउँ तव होइ अकाजू। बना आइ असमंजस आजू।। सुनि महीस बोलेउ मृदु बानी। नाथ निगम असि नीति बखानी।। बड़े सनेह लघुन्ह पर करहीं। गिरि निज सिरनि सदा तृन धरहीं।। जलधि अगाध मौलि बह फेनू। संतत धरनि धरत सिर रेनू।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 352 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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