🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 344

The Book of Childhood · Entry 344 of 760 · type: चौपाई

जनि आचरुज करहु मन माहीं। सुत तप तें दुर्लभ कछु नाहीं।। तपबल तें जग सृजइ बिधाता। तपबल बिष्नु भए परित्राता।। तपबल संभु करहिं संघारा। तप तें अगम न कछु संसारा।। भयउ नृपहि सुनि अति अनुरागा। कथा पुरातन कहै सो लागा।। करम धरम इतिहास अनेका। करइ निरूपन बिरति बिबेका।। उदभव पालन प्रलय कहानी। कहेसि अमित आचरज बखानी।। सुनि महिप तापस बस भयऊ। आपन नाम कहत तब लयऊ।। कह तापस नृप जानउँ तोही। कीन्हेहु कपट लाग भल मोही।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 344 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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