🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 334

The Book of Childhood · Entry 334 of 760 · type: चौपाई

फिरत बिपिन आश्रम एक देखा। तहँ बस नृपति कपट मुनिबेषा।। जासु देस नृप लीन्ह छड़ाई। समर सेन तजि गयउ पराई।। समय प्रतापभानु कर जानी। आपन अति असमय अनुमानी।। गयउ न गृह मन बहुत गलानी। मिला न राजहि नृप अभिमानी।। रिस उर मारि रंक जिमि राजा। बिपिन बसइ तापस कें साजा।। तासु समीप गवन नृप कीन्हा। यह प्रतापरबि तेहि तब चीन्हा।। राउ तृषित नहि सो पहिचाना। देखि सुबेष महामुनि जाना।। उतरि तुरग तें कीन्ह प्रनामा। परम चतुर न कहेउ निज नामा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 334 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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