🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 330

The Book of Childhood · Entry 330 of 760 · type: चौपाई

हृदयँ न कछु फल अनुसंधाना। भूप बिबेकी परम सुजाना।। करइ जे धरम करम मन बानी। बासुदेव अर्पित नृप ग्यानी।। चढ़ि बर बाजि बार एक राजा। मृगया कर सब साजि समाजा।। बिंध्याचल गभीर बन गयऊ। मृग पुनीत बहु मारत भयऊ।। फिरत बिपिन नृप दीख बराहू। जनु बन दुरेउ ससिहि ग्रसि राहू।। बड़ बिधु नहि समात मुख माहीं। मनहुँ क्रोधबस उगिलत नाहीं।। कोल कराल दसन छबि गाई। तनु बिसाल पीवर अधिकाई।। घुरुघुरात हय आरौ पाएँ। चकित बिलोकत कान उठाएँ।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 330 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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