🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 318

The Book of Childhood · Entry 318 of 760 · type: चौपाई

देखि प्रीति सुनि बचन अमोले। एवमस्तु करुनानिधि बोले।। आपु सरिस खोजौं कहँ जाई। नृप तव तनय होब मैं आई।। सतरूपहि बिलोकि कर जोरें। देबि मागु बरु जो रुचि तोरे।। जो बरु नाथ चतुर नृप मागा। सोइ कृपाल मोहि अति प्रिय लागा।। प्रभु परंतु सुठि होति ढिठाई। जदपि भगत हित तुम्हहि सोहाई।। तुम्ह ब्रह्मादि जनक जग स्वामी। ब्रह्म सकल उर अंतरजामी।। अस समुझत मन संसय होई। कहा जो प्रभु प्रवान पुनि सोई।। जे निज भगत नाथ तव अहहीं। जो सुख पावहिं जो गति लहहीं।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 318 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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