🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 316

The Book of Childhood · Entry 316 of 760 · type: चौपाई

सुनि प्रभु बचन जोरि जुग पानी। धरि धीरजु बोली मृदु बानी।। नाथ देखि पद कमल तुम्हारे। अब पूरे सब काम हमारे।। एक लालसा बड़ि उर माही। सुगम अगम कहि जात सो नाहीं।। तुम्हहि देत अति सुगम गोसाईं। अगम लाग मोहि निज कृपनाईं।। जथा दरिद्र बिबुधतरु पाई। बहु संपति मागत सकुचाई।। तासु प्रभा जान नहिं सोई। तथा हृदयँ मम संसय होई।। सो तुम्ह जानहु अंतरजामी। पुरवहु मोर मनोरथ स्वामी।। सकुच बिहाइ मागु नृप मोहि। मोरें नहिं अदेय कछु तोही।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 316 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷