🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 292

The Book of Childhood · Entry 292 of 760 · type: चौपाई

परम स्वतंत्र न सिर पर कोई। भावइ मनहि करहु तुम्ह सोई।। भलेहि मंद मंदेहि भल करहू। बिसमय हरष न हियँ कछु धरहू।। डहकि डहकि परिचेहु सब काहू। अति असंक मन सदा उछाहू।। करम सुभासुभ तुम्हहि न बाधा। अब लगि तुम्हहि न काहूँ साधा।। भले भवन अब बायन दीन्हा। पावहुगे फल आपन कीन्हा।। बंचेहु मोहि जवनि धरि देहा। सोइ तनु धरहु श्राप मम एहा।। कपि आकृति तुम्ह कीन्हि हमारी। करिहहिं कीस सहाय तुम्हारी।। मम अपकार कीन्ही तुम्ह भारी। नारी बिरहँ तुम्ह होब दुखारी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 292 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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