🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 290

The Book of Childhood · Entry 290 of 760 · type: चौपाई

पुनि जल दीख रूप निज पावा। तदपि हृदयँ संतोष न आवा।। फरकत अधर कोप मन माहीं। सपदी चले कमलापति पाहीं।। देहउँ श्राप कि मरिहउँ जाई। जगत मोर उपहास कराई।। बीचहिं पंथ मिले दनुजारी। संग रमा सोइ राजकुमारी।। बोले मधुर बचन सुरसाईं। मुनि कहँ चले बिकल की नाईं।। सुनत बचन उपजा अति क्रोधा। माया बस न रहा मन बोधा।। पर संपदा सकहु नहिं देखी। तुम्हरें इरिषा कपट बिसेषी।। मथत सिंधु रुद्रहि बौरायहु। सुरन्ह प्रेरी बिष पान करायहु।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 290 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷