🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 288

The Book of Childhood · Entry 288 of 760 · type: चौपाई

जेहि दिसि बैठे नारद फूली। सो दिसि देहि न बिलोकी भूली।। पुनि पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं। देखि दसा हर गन मुसकाहीं।। धरि नृपतनु तहँ गयउ कृपाला। कुअँरि हरषि मेलेउ जयमाला।। दुलहिनि लै गे लच्छिनिवासा। नृपसमाज सब भयउ निरासा।। मुनि अति बिकल मोंहँ मति नाठी। मनि गिरि गई छूटि जनु गाँठी।। तब हर गन बोले मुसुकाई। निज मुख मुकुर बिलोकहु जाई।। अस कहि दोउ भागे भयँ भारी। बदन दीख मुनि बारि निहारी।। बेषु बिलोकि क्रोध अति बाढ़ा। तिन्हहि सराप दीन्ह अति गाढ़ा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 288 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷