🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 284

The Book of Childhood · Entry 284 of 760 · type: चौपाई

कुपथ माग रुज ब्याकुल रोगी। बैद न देइ सुनहु मुनि जोगी।। एहि बिधि हित तुम्हार मैं ठयऊ। कहि अस अंतरहित प्रभु भयऊ।। माया बिबस भए मुनि मूढ़ा। समुझी नहिं हरि गिरा निगूढ़ा।। गवने तुरत तहाँ रिषिराई। जहाँ स्वयंबर भूमि बनाई।। निज निज आसन बैठे राजा। बहु बनाव करि सहित समाजा।। मुनि मन हरष रूप अति मोरें। मोहि तजि आनहि बारिहि न भोरें।। मुनि हित कारन कृपानिधाना। दीन्ह कुरूप न जाइ बखाना।। सो चरित्र लखि काहुँ न पावा। नारद जानि सबहिं सिर नावा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 284 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷