🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 282

The Book of Childhood · Entry 282 of 760 · type: चौपाई

हरि सन मागौं सुंदरताई। होइहि जात गहरु अति भाई।। मोरें हित हरि सम नहिं कोऊ। एहि अवसर सहाय सोइ होऊ।। बहुबिधि बिनय कीन्हि तेहि काला। प्रगटेउ प्रभु कौतुकी कृपाला।। प्रभु बिलोकि मुनि नयन जुड़ाने। होइहि काजु हिएँ हरषाने।। अति आरति कहि कथा सुनाई। करहु कृपा करि होहु सहाई।। आपन रूप देहु प्रभु मोही। आन भाँति नहिं पावौं ओही।। जेहि बिधि नाथ होइ हित मोरा। करहु सो बेगि दास मैं तोरा।। निज माया बल देखि बिसाला। हियँ हँसि बोले दीनदयाला।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 282 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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