🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 280

The Book of Childhood · Entry 280 of 760 · type: चौपाई

देखि रूप मुनि बिरति बिसारी। बड़ी बार लगि रहे निहारी।। लच्छन तासु बिलोकि भुलाने। हृदयँ हरष नहिं प्रगट बखाने।। जो एहि बरइ अमर सोइ होई। समरभूमि तेहि जीत न कोई।। सेवहिं सकल चराचर ताही। बरइ सीलनिधि कन्या जाही।। लच्छन सब बिचारि उर राखे। कछुक बनाइ भूप सन भाषे।। सुता सुलच्छन कहि नृप पाहीं। नारद चले सोच मन माहीं।। करौं जाइ सोइ जतन बिचारी। जेहि प्रकार मोहि बरै कुमारी।। जप तप कछु न होइ तेहि काला। हे बिधि मिलइ कवन बिधि बाला।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 280 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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