🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 274

The Book of Childhood · Entry 274 of 760 · type: चौपाई

राम कीन्ह चाहहिं सोइ होई। करै अन्यथा अस नहिं कोई।। संभु बचन मुनि मन नहिं भाए। तब बिरंचि के लोक सिधाए।। एक बार करतल बर बीना। गावत हरि गुन गान प्रबीना।। छीरसिंधु गवने मुनिनाथा। जहँ बस श्रीनिवास श्रुतिमाथा।। हरषि मिले उठि रमानिकेता। बैठे आसन रिषिहि समेता।। बोले बिहसि चराचर राया। बहुते दिनन कीन्हि मुनि दाया।। काम चरित नारद सब भाषे। जद्यपि प्रथम बरजि सिवँ राखे।। अति प्रचंड रघुपति कै माया। जेहि न मोह अस को जग जाया।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 274 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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