🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 272

The Book of Childhood · Entry 272 of 760 · type: चौपाई

भयउ न नारद मन कछु रोषा। कहि प्रिय बचन काम परितोषा।। नाइ चरन सिरु आयसु पाई। गयउ मदन तब सहित सहाई।। मुनि सुसीलता आपनि करनी। सुरपति सभाँ जाइ सब बरनी।। सुनि सब कें मन अचरजु आवा। मुनिहि प्रसंसि हरिहि सिरु नावा।। तब नारद गवने सिव पाहीं। जिता काम अहमिति मन माहीं।। मार चरित संकरहिं सुनाए। अतिप्रिय जानि महेस सिखाए।। बार बार बिनवउँ मुनि तोहीं। जिमि यह कथा सुनायहु मोहीं।। तिमि जनि हरिहि सुनावहु कबहूँ। चलेहुँ प्रसंग दुराएडु तबहूँ।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 272 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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