🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 260

The Book of Childhood · Entry 260 of 760 · type: चौपाई

सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए। बिपुल बिसद निगमागम गाए।। हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई।। राम अर्तक्य बुद्धि मन बानी। मत हमार अस सुनहि सयानी।। तदपि संत मुनि बेद पुराना। जस कछु कहहिं स्वमति अनुमाना।। तस मैं सुमुखि सुनावउँ तोही। समुझि परइ जस कारन मोही।। जब जब होइ धरम कै हानी। बाढहिं असुर अधम अभिमानी।। करहिं अनीति जाइ नहिं बरनी। सीदहिं बिप्र धेनु सुर धरनी।। तब तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा। हरहि कृपानिधि सज्जन पीरा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 260 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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