🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 26

The Book of Childhood · Entry 26 of 760 · type: चौपाई

जे जनमे कलिकाल कराला। करतब बायस बेष मराला।। चलत कुपंथ बेद मग छाँड़े। कपट कलेवर कलि मल भाँड़ें।। बंचक भगत कहाइ राम के। किंकर कंचन कोह काम के।। तिन्ह महँ प्रथम रेख जग मोरी। धींग धरमध्वज धंधक धोरी।। जौं अपने अवगुन सब कहऊँ। बाढ़इ कथा पार नहिं लहऊँ।। ताते मैं अति अलप बखाने। थोरे महुँ जानिहहिं सयाने।। समुझि बिबिधि बिधि बिनती मोरी। कोउ न कथा सुनि देइहि खोरी।। एतेहु पर करिहहिं जे असंका। मोहि ते अधिक ते जड़ मति रंका।। कबि न होउँ नहिं चतुर कहावउँ। मति अनुरूप राम गुन गावउँ।। कहँ रघुपति के चरित अपारा। कहँ मति मोरि निरत संसारा।। जेहिं मारुत गिरि मेरु उड़ाहीं। कहहु तूल केहि लेखे माहीं।। समुझत अमित राम प्रभुताई। करत कथा मन अति कदराई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 26 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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