🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 258

The Book of Childhood · Entry 258 of 760 · type: चौपाई

ससि कर सम सुनि गिरा तुम्हारी। मिटा मोह सरदातप भारी।। तुम्ह कृपाल सबु संसउ हरेऊ। राम स्वरुप जानि मोहि परेऊ।। नाथ कृपाँ अब गयउ बिषादा। सुखी भयउँ प्रभु चरन प्रसादा।। अब मोहि आपनि किंकरि जानी। जदपि सहज जड नारि अयानी।। प्रथम जो मैं पूछा सोइ कहहू। जौं मो पर प्रसन्न प्रभु अहहू।। राम ब्रह्म चिनमय अबिनासी। सर्ब रहित सब उर पुर बासी।। नाथ धरेउ नरतनु केहि हेतू। मोहि समुझाइ कहहु बृषकेतू।। उमा बचन सुनि परम बिनीता। रामकथा पर प्रीति पुनीता।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 258 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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