🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 254

The Book of Childhood · Entry 254 of 760 · type: चौपाई

एहि बिधि जग हरि आश्रित रहई। जदपि असत्य देत दुख अहई।। जौं सपनें सिर काटै कोई। बिनु जागें न दूरि दुख होई।। जासु कृपाँ अस भ्रम मिटि जाई। गिरिजा सोइ कृपाल रघुराई।। आदि अंत कोउ जासु न पावा। मति अनुमानि निगम अस गावा।। बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना। कर बिनु करम करइ बिधि नाना।। आनन रहित सकल रस भोगी। बिनु बानी बकता बड़ जोगी।। तनु बिनु परस नयन बिनु देखा। ग्रहइ घ्रान बिनु बास असेषा।। असि सब भाँति अलौकिक करनी। महिमा जासु जाइ नहिं बरनी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 254 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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