🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 226

The Book of Childhood · Entry 226 of 760 · type: चौपाई

संभु चरित सुनि सरस सुहावा। भरद्वाज मुनि अति सुख पावा।। बहु लालसा कथा पर बाढ़ी। नयनन्हि नीरु रोमावलि ठाढ़ी।। प्रेम बिबस मुख आव न बानी। दसा देखि हरषे मुनि ग्यानी।। अहो धन्य तव जन्मु मुनीसा। तुम्हहि प्रान सम प्रिय गौरीसा।। सिव पद कमल जिन्हहि रति नाहीं। रामहि ते सपनेहुँ न सोहाहीं।। बिनु छल बिस्वनाथ पद नेहू। राम भगत कर लच्छन एहू।। सिव सम को रघुपति ब्रतधारी। बिनु अघ तजी सती असि नारी।। पनु करि रघुपति भगति देखाई। को सिव सम रामहि प्रिय भाई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 226 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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