🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 223

The Book of Childhood · Entry 223 of 760 · type: चौपाई

तुरत भवन आए गिरिराई। सकल सैल सर लिए बोलाई।। आदर दान बिनय बहुमाना। सब कर बिदा कीन्ह हिमवाना।। जबहिं संभु कैलासहिं आए। सुर सब निज निज लोक सिधाए।। जगत मातु पितु संभु भवानी। तेही सिंगारु न कहउँ बखानी।। करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा।। हर गिरिजा बिहार नित नयऊ। एहि बिधि बिपुल काल चलि गयऊ।। तब जनमेउ षटबदन कुमारा। तारकु असुर समर जेहिं मारा।। आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। षन्मुख जन्मु सकल जग जाना।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 223 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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