🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 220

The Book of Childhood · Entry 220 of 760 · type: चौपाई

बहु बिधि संभु सास समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई।। जननीं उमा बोलि तब लीन्ही। लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही।। करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा।। बचन कहत भरे लोचन बारी। बहुरि लाइ उर लीन्हि कुमारी।। कत बिधि सृजीं नारि जग माहीं। पराधीन सपनेहुँ सुखु नाहीं।। भै अति प्रेम बिकल महतारी। धीरजु कीन्ह कुसमय बिचारी।। पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेम कछु जाइ न बरना।। सब नारिन्ह मिलि भेटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 220 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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